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Friday, 4 January 2019

January 04, 2019

Making a brand name and brand positioning

      Making a brand name and brand positioning - Brand name और brand positioning किसी भी business के लिए बहोत important होता है. business की ग्रोथ के लिए ये बहोत जरूरी होता है.

       मै अपने पहले पोस्ट लिख चूका हू कि किस तरह हमारी industrialization की  branding न होने के कारण हमारी देश कि बनी चिजे international market मे तो क्या अपने देश मे भी टिक नही पाई. तो आज हम देखेंगे brand मतलब होता क्या है.
Making a brand name and brand positioning

Making a brand name and brand positioning


      जनरली start-up business करनेवाले 'Logo' को ही brand समजते है. brand का मतलब किसी भी कंपनी के product पे दिखाया गया लोगो का विश्वास होता है. मतलब कोई नहाने का साबून बोलेगा तो Lux, Pears या Lifeboy  का ही नाम सामने आता है. लेकीन Indian brand की Medimix  भी अच्छा होता है. Lux बडा brand है. लेकिन Medimix का ज्यादातर लोगो को मालूम भी नही रहेगा. जब कि वो इक आयुर्वेदिक बिना केमिकल मिश्रीत साबून है. मै  अपनी पिछली पोस्ट डोमिनोज के बारे मे लिख चूका हू. अगर हम किसी को पुछे कि डोमिनोज किस चिज के लिए फेमस है तो सब जवाब देंगे पिझ्झा के लिए.लेकिन पिझ्झा तो पिझ्झाहट और पापाजाॅन का भी अच्छा होता है, लेकिन डोमिनोज फेमस है 30 मिनट के अंदर डिलिव्हरी करने के लिए. उनका श्लोगन यही है 'खुशियों कि होम डिलीव्हरी', '30 मिनिट में होम डिलिव्हरी.' वो टाईम पे ज्यादा फोकस करते है. उन्होंने लोगो कि जरूरत पर ज्यादा ध्यान दिया. किसी भी business में कुछ अलग करने कि जरूरत होती है. क्योंकि वो बडा brand बन पाये और अपने brand कि market मे इक position बना पाये.
  
   कभी कभी इक अच्छा श्लोगन भी business के लिए game changer साबित होता है. आप दखिए बडे बडे brand का कोई ना कोई श्लोगन या टॅगलाईन जरूर होती है. जैसे,
NIKE - Just do it,
Apple - Think different,
BMW - Altimate  driving machine,
Amul - atterely butterly delicious,
Coca Cola - थंडा मतलब कोकाकोला.
Kingfisher - King of good times.
Mentos - दिमाग कि बत्ती जला दे.
Raymond - The complete man,
Surf excel - दाग अच्छे है.
   ऐसे श्लोगन से कस्टमर के दिमाग मे वो brand फिट बैठता है और वो वही खरीदता है.

LOGO

   किसी भी product का Logo भी बहोत मायने रखता है. Logo आपके business का चेहरा होता है, आपकी पहचान होती है. कभी कभी लोग Logo से ही product के brand कि असली और नकली की परख करते है.

 आजकल आप देखेंगे कि  बडे बडे कंपनियोंने अपने लोगो बदल दिये है. आजकल के कस्टमर के बदलती demand  और उन्हे attract करने के लिए तथा कंपनी के product में जो बदलाव किए गये उनके के प्रदर्शन के लिए नये Logo लान्च किए गये है.
  Logo पाच भागो मे divide होता है.
1) background.
2) size.
3) colour.
4) structure.
5) nature.
   Example के लिए हम amazon लेंगे
1) background - black.
2) size - only 'a''.
3) colour - white/yellow.
4) structure - all side open.
5) nature - all included.

     इस मे दिखाया गया बाण a से z तक जाता है, जिस से वो ये दिखाना चाहते है कि वो सब चिजे बेचते है और black background और white/yellow से वो ये दिखाते है की वो कोई भी भेदभाव नही करते.

     Logo बनाने से पहले वो क्यो होना चाहीए, उस logo से आप क्या संदेश देना चाहते है और किस चिज को टारगेट करना चाहते है ये सब बातों का पहले हि विचार करना जरूरी होता है. ये सब चिजे start-up मे ही क्लिअर होनी चाहिए.

LABAL POSITIONING

    हमारे गाव मे चावल कि खेति अच्छी होती है और यहा पोहा बनानेवाले बहोत सारे लोग है. वो लोग पोहा 40 रूपये kg से इक लोकल  mall मे बेचते है और वो mall वाला 54 रूपये kg से अपना लेबल लगा के लोगो को बेचता है. वो ये नही देखता कि पोहा आता कहा से है. उसको 40 रूपये अच्छा पोहा मिल जाता है बस. लोग भी उसका brand देखकर खरीद लेते है. इसको लेबल पोजिशिंनिग कहते है. ये होते है brand के फायदे.

   आज LG भारत मे नंबर वन होम अॅपलासेंस बनानेवाली कंपनी है. 1997 मे जब LG हमारे देश मे आया था तो उन्होंने कहा था," हम पहले brand बनाते है बाद मे कंपनी डालते है." ये बहोत सोचनेवाली बात है. LG हमारे देश कि कंपनी से ही product बनवाके लेती थी और अपना लेबल लगा के बेचती थी. 2005 मे महाराष्ट्र के रांजनगाव मे उन्होंने पहली खुद की कंपनी बनाई तब LG brand बहोत बडा हो चुका था. लोग आँख बंद करके उस पे विश्वास रखते है. ये होती है brand कि पाॅवर.

   आज जो भी लोग start-up कर रहे उन्हे brand पर बहोत सिरीअसली सोचना चाहिए. branding को daily update करने कि जरूरत होती. चाहे वो किसी भी माध्यम से. advertisement से या promotion से हो  लोगो के मन मे जगह बनानी पडती है.कस्टमर कि demand और उसकी service ये दो चिजे बहोत important होती है. आज आप किसी चिज का start-up कर रहे हो उसमे जो कोई भी बडा brand होगा तो वो बडा brand क्यो है, उसने ऐसा क्या किया कि वो बडा brand बन गया इसका study करना जरूरी है. आप का brand भविष्य मे कैसा होगा उसकी positioning कैसी होगी इसकी शुरूवात start-up मे ही करनी चाहिए.
  




Wednesday, 26 December 2018

December 26, 2018

Indian Market World's Selling Centre

 

Indian Market World's Selling Centre 

आज अपना भारत देश और Indian market सिर्फ बाहरी देश का इक बहोत बडा  market बन के रह गया है. अपने देश के लोग ज्यादातर बाहरी देश brand पसंद करते है, ज्यादातर युवा. बाहरी देश का brand युज करने को वो style और status मानते है. अच्छी पढाई लिखाई कर के वो multinational company मे जाॅब पाना चाहते है. लेकिन खुद का business खुद का Indian brand बनाना ये बहोत कम युवा सोचते.


Indian Market World's Selling Centre



            हम और  foreign brand

   आज का युवा सुबह उठता है तो Samsung,Apple,LG की फोन कि आलार्म से फिर Colgate की toothpest और brush से ब्रश करेगा फिर Gillette के शेवर से शेव करेगा और Dettol का अॅन्टोसेफ्टिक लगायेगा. Lux या pears साबून से नहायेगा फिर Jocky की अंडरविअर पहनेगा Petter England का शर्ट पहनेगा,Blackberry कि पॅन्ट पहनेगा Unilever brand कि कोई चाय या काॅफी पियेगा उसके साथ Britania का ब्रेड या चिज खायेगा नही तो Kellogs या Maggi तो होती ही है नाष्ते मे. नाष्टा करते समय Samsung, LG के LED पर CNBC या BBC या फिर STAR SPORTS या ESPN चॅनल देखेंगे उसके बाद PUMA, ADDIDAS के शूज या Bata के जूते पहनकर  rayban का गाॅगल लगाकर, i10, i20 या कोई और foreign brand कि कार लेकर ऑफिस जायेंगे.ऑफिस मे Apple DELL,LG या SAMSUNG के लॅपटाॅप पे MICROSOFT और GOOGLE के साथ आठ घंटे काम करेंगे शाम को PIZZA या DOMINOZ का Pizza लेके आयेंगे साथ में FOSTER के दो बिअर भी लायेंगे बिअर पियेंगे pizza खायेंगे फिर SONY, SAMSUG ,LG केLED पे CNBC BBC ESPN चेनल देखेंगे.LG, SAMSUNG का AC लगायेंगे और सो जायेंगे फिर सुबह SAMSUNG, LG के फोन के आलार्म के उठ जायेंगे.
   ये है आज के युवावो का दिनक्रम और lifestyle with status. पूरे दिन में हम इक भी वस्तू made in india यूज नही करते और हमारा सारा पैसा brand के नाम पर बाहर देश चला जाता है.( बचा कुचा नेते लोग खा जाते है.) बाहर कि कंपनिया यही अपने देश में हि प्राॅडक्ट बनाती है और यही हमे ही बेचती है और हम इन बाहरी चिजे यूज करने में अपना status मानते है. हम और हमारा देश इक contract manufacturer बन के रह जाते है.





देश के लिए हमे क्या करना चाहिए

   1991 मे भारत मे खुली अर्थ व्यवस्था लागू कर दि गयी जिसके हमे फायदे भी बहोत हुए. industrialization बढ गया,लोगो को रोजगार मिलने लगे हमारा economy स्थर भी बढ गया लेकिन इसके नूकसान भी बहोत सारे है जो अभी दिखाई नही देते.
    पहले Onida और Videocon के TV घर मे होना शान कि बात थी आज Onida और Videocon के TV कोई नाम लेता नही.  उनकी जगह Sony,Samsung और LG ने ले ली है. अॅम्बेसिडर,प्रिमीअर पद्मिनी इन कारों कि जगह Ford,Nissan,Hyundai,Skoda, BMW ने ले लिया.दुरदर्शन कि जगह BBC ESPN  ने ले ली. BAJAJ के प्राॅडक्ट की जगह LG के प्राॅडक्टोने ले ली. मफतलाल के कपडे कि जगह PETER ENGLAND, LEVIS,BLACKBERRY ने ली.
    इस बदलाव के कारण हमारी आर्थिक उन्नती जैसी होनी चाहिए थी वैसे हुई नही. हमारे देश मे हम से हि प्राॅडक्ट बनवाकर अपना लेबल लगाकर हमे ही बेचा जाता है. इतने बडे का बदलाव के कारण तो बहोत सारे है. पहला कारण है हमारी मानसिकता. हमे देसी चिजें इस्तेमाल करने मे शरम आती है और विदेशी चिजें इस्तेमाल करने में हम style और status महसूस करते है. दुसरा मेन कारण यह है कि हमारे businessman अपने business मे कोई बदलाव नही कर पाये,ग्राहकोंकी जरूरतो को नही समज पाये. और अगर समझ पाये तो अच्छी सर्विस नही दे पाये.कोई अच्छी business  strategy नही कर पाये.
    मै उदाहरण के तौर पर micromax mobile का दूंगा. वो दुसरे नंबर का लिड ब्रॅन्ड था लेकिन बाद मे आये vivo,redmi इन कंपनियोंने online, offline और artificial shortage ये strategies अपनाकर micromax mobile को बाहर कर दिया.
   विदेशी कंपनिया भारत के किसी कंपनी को अपना पार्टनर बनाती है और इक बार मार्केट समझ में आने के बाद उसे छोडकर अपना खूद का ब्रॅन्ड मार्केट में लाती है. जैसे के Hero-Honda,Mahindra-Nissan, ऐसे बहोत सारे उदाहरण है.कल वो अलग होंगे और हम ब्रन्ड के नाम पे विदेशी चिजें खरीदेंगे और हमारा made in India ब्रॅन्ड दिखाई भी नही देगा. आज बहोत सारी चिजें China में बनती है लेकिन बेचने के लिए Indian मार्केट मे लाई जाती है. ये तो बहोत ही गंभीर हालात है क्यों कि हमें मिलनेवाला contract manufacturer का पैसा अब China चला गया और हमारा देश सिर्फ खरीदारी करने का मार्केट बन के रह गया है.
    आज जो भारतिय नागरिक business start-up करना चाहते उन्हे मेरा नम्र निवेदन है कि अपने प्राॅडक्ट का brand बनाये. वो सब strategy अपनाये जो बाहरदेश कि कंपनिया आजमाती है. जैसे Dominiz pizza वाले time strategy पर काम करते है. pizza कि आधे घंटे मे delivery करते है. कुछ mobile कंपनिया artificial shortage दिखा के sell बढाती है. अच्छा promotion करती है. cash on delivery,return policy जैसी strategy अपनाती है. customer की मानसिकता study करती है. ये आप को भी करना पडेगा. Samsung जब India में आया तब उन्होंने promotion के लिए आमिर खान को चूना क्यों कि आमिर खान का युवावो में क्रेझ था और वो जानते थे mobile का ज्यादातर use युवा ही करेंगे और देखते ही देखते Samsung India मे popular हो गया. इन छोटी छोटी बातों का आपको ध्यान रखना पडेगा इक बडा brand बनाने के लिए. उसके साथ quality भी विशेष ध्यान रखना पडता है उस मे कोई compromise नही चलता.
   सारे start-up और running businessman लोगो ऐसी कोई मुहीम चलानी चाहिए जिस से हमारे भारतिय लोग हमारी देसी brand  कि चिजे इस्तेमाल करने लग जाय. मानना पडेगा टाटा बिर्ला और Reliance को जो Indian कंपनिया आज भी India कि शान है. India के लोगो को भी मानना पडेगा क्यों कि आज भी उनका LIC पे विश्वास है. SBI आज भी India की नंबर वन बैंक है. बाबा रामदेव स्वदेशी चिजे इस्तेमाल करने के लिए आग्रह करते है. गांधीजीने जो स्वदेसी का आंदोलन छेडा था उसकी आज बहोत जरूरत है. तभी हमारा देश अव्वल नंबर पर आयेगा.
   जय हिंद.

 सतविचारमोती.

  ज्ञान और विवेक दो ऐसी आँखे है जो जिवन के सत्य और आंतरआत्मा दोनो के रूप देख सकती है.




Sunday, 9 December 2018

December 09, 2018

5s implementation plan in business as well as in our personal life

         

 5s implementation plan - जो लोग किसी कंपनी में employee है या रह चूके है वो तो  5-S के बारे मे जानते होंगे और जो नही है वो आज जान जायेंगे. किसी भी business मे 5-S implimentation का असाधारण महत्व है. जिस से time की बचत होती है, wastage कम होता है, safety बढती है, men और machine  की efficiency बढती है. all over company की growth होती है.

    Japan के Sakichi Toyado उनके बेटे Kiichiro और Taiichi Ohno जो की Yoyato के engineer थे उन्होने ये 5-S प्रणाली का निर्माण किया.
                                     
                                                 




                     5-IMPLIMENTATION PLAN

 5-S क्या है??

1)Seiri (Stucturise)-अनचाही चिजें बाहर निकालना.
2)Seiton(Systematise)- जरूरत की चिजे काम के क्रम के अनुसार रखना.
3)Seiso(Sanitise)-अच्छी से सफाई करना.
4)Seiketsu(Standardise)-उपर तिन्हों प्रणाली का अवलोकन करना.
5)Shitsuke(Self Discipline)-5s प्रणाली दुसरे लोगो को सिखाना.

1)Seiri (Stucturise) - इस process हम हमारी काम की जगह पर जो बिना उपयोग कि वस्तू है उसे बाहर निकाल देते है.जिससे आवश्यक वस्तू के लिए जगह बन जाती है.वस्तू कम होने से disturbance भी कम होता है.वस्तू ढून्ढने के टाईम मे बचत होती है. सुरक्षा हेतू भी ये लाभदायक है.
   इस process मे सब वस्तू चेक कि जाती है. उसके आवश्यकता के अनुसार उसका मुल्यांकन होता है. जो अभी उपयुक्त नही लेकिन बाद मे उपयोग मे आनेवाली है उसे red tag area मे डाला जाता है.

2)Seiton (Systematise) - इस activity मे काम कि लगनेवाली चिजों को उसके उपयोग के क्रम के अनुसार लेबल लगाकर रखा जाता है. जिस से उसका उपयोग और जगह स्पष्ठ होती है.
   इस से काम करने कि क्रिया सुलभ होती है.इस से उस वस्तु को ढूंढ़ने में आसानी होती है.वस्तु खोने से बचती है.और काम होने के बाद वस्तु अपने जगह पर रखी जाती है.

3)Seiso(Sanitise) - काम की जगह अच्छी तरह सफाई करे.
   अच्छी सफाई से काम कि जगह और मशिनों को बार बार चेक किया जाता है. इस से चिजे खराब होने से बचती है. सुरक्षितता बढती है. काम करने के लिए मन को प्रोत्साहान मिलता है. product कि quality भी improve होती है.

4)Seiketsu(Standardise) - कार्य स्थल का और कार्य प्रणाली का  standardisation किया जाता है. उपर कि तिन्हो process योग्य तरह से चले इस के लिए इक मानक बनाए. कि उपर कि process का कभी खंडन न हो और वो परीपूर्ण प्रक्रिया से चलता रहे.
   सब प्रक्रिया योग्य तरह से चल रही है इसके लिए फोटो और visual control का प्रयोग किया जाता है. इस के योग्य परीणाम के लिए audit checklist का प्रयोग किया जाता है. हर इक employee को अपने जिम्मेदारी से अवगत किया जाता है.

5)Shitsuke(Self Dicilpline) - इस मे 5-s process को  अपने daily work कि आदत बनाई जाती है और दुसरे लोगो को follow करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.
  5-s training session का आयोजन किया जाता है. regular audit कर के ये तसल्ली कि जाती है 5-s process योग्य तरह से चल रही है. जब जरूरत हो तब नया बदलाव लाए उसके employee का सहयोग बहोत महत्वपूर्ण होता है. जब भी कोई issue हो वो दुबारा न हो इसके लिए जो बदलाव जरूरी होता है वो करे.

                                   "5-s implementation in start-up business"

      आप इस process को start-up के लिए भी use कर सकते हो.

1)Seiri ( Stucturise ) - जब आप कोई business plan   कर रहे हो तो सबसे पहले अपने मन में आनेवाले negative विचारों को मन से बाहर कर दो.

2)Seiton ( Systematise ) - जब भी आप के मन मे कोई अच्छा business idea आता है तो उसके implementation का इक systematic business plan बनाओ कि पहले कोन सी चिज करनी है और उसके बाद कोनसी चिज करनी है. बाद मे करनी वाली चिजों को कही लिखकर रखिए क्यों कि वो आपको याद रहे. इस के लिए आप एक notebook उपयोग कर सकते है.

3)Seiso ( Sanitise ) - अपने मन को positive विचारों से साफ करो. आनंदी रहो. motivational stories पढो. बडे बडे businessman की biography पढो जिस से आप के मन को प्रेरणा मिले.

4)Seiketsu ( Standardise) - उपर के तिन्हो प्रक्रिया का खंडन न हो इसका ध्यान रखे.उसके लिए आप अपने कमरे मे इस का इक chart बना के रख सकते है जिस पर आप कि नजर बार बार पडे.

5)Shitsuke ( Self Dicipline ) - आप अपने दिमाग को इक employee समज कर खुद train करे ये चिजे करने के लिए. हर इंसान के दिमाग में अच्छे अच्छे ideas आते है. अपने हिसाब से आप इस में बदलाव भी कर सकते है.

                                     "5-s implementation in our personal life."


1)Seiri ( Stucturise ) - अपने मन में आनेवाले बुरे विचारों को मन से बाहर कर दो. जैसे गुस्सा, लालच,शक करना, किसी का बुरा चाहना,किसी बात कि बहोत ज्यादा चिंता करना.जिस से आप के मन में अच्छे विचारों जगह मिलेगी.

2)Seiton ( Systemasation ) - इसे में जो अच्छे विचार है उन्हें प्रथम स्थान दो जैसे किसी कि मदत करना, लोगो से अच्छा बर्ताव करना, दान-धर्म करना आदी अच्छे विचार मन में आयेंगे तो बुरे विचार मन मे आयेंगे नही.

3)Seiso ( Sanitise ) - इस में आप अपने मन को साफ करो जिसके लिए आप भगवान के नाम का जाप करो,भजन किर्तन करो,धार्मिक ग्रंथ पढो और अपने मन को साफ और निर्मल बनाइए.

4)Seiketsu (Standardise) - मन ही मन में ऐसा मानक बनाइए कि उपर लिखे तिन्हों गतविधीयों का खंडन न होने पाए.इसके लिए आप मन ही मन में सही चिजों का चित्र बनाइए. उस पर सुधार लाए.

5)Shitsuke ( Self Dicipline ) - आप ही अपने मन को अच्छी चिजें करने के लिए प्रशिक्षित करो.मन को हमेशा अच्छे कर्म करने के लिए प्रोत्साहित करो.  हमारे बर्ताव में कितना सुधार आया है,हमारा बर्ताव पहले कैसा था और अब कैसा है इसका अवलोकन भी करो.अच्छे कर्म करने के लिए खुद ही वचनबद्ध हो जाओ.
     सच मे आपको इक अलग अनुभूती होगी. आप के मन को शांती मिलेगी.

  Motivational Thoughts

     किसी भी इंसान कि हार या जित दो बार होती है. पहले मन में फिर मैदान मे. आप सोचोगे कि आप जित जाओगे तो आप जित ही जाओगे,आप सोचोगे आप हार जाओगे तो आप हार ही जाओगे.Success कि शुरूवात हमेशा मन से होती है. बलवान कि हमेशा जित नही होती, जित होती है किसी भी इंसान कि प्रबल इच्छाशक्ती की.



Thursday, 1 November 2018

November 01, 2018

Solar Farming and Solar business for start up

      
      Solar Farming and Solar business for start up - सोलर फार्मिंग और सोलर बिज़ीनेस  start-up के लिए बहोत अच्छा है. आगे इसकी बहोत growth होनेवाली है. इस business idea से आप बहोत money earn कर सकते हो.
                                         
Solar Farming
                     

                          Solar Farming and Solar business

        
     हमने आज तक गेहू की खेती,चावल की की खेती गन्ने की खेती और सब्जी की खेती सुना था पर सूरज की खेती कभी नही सुना होगा. जी हा ये होती है. जहा बंजर ज़मीन हो, जहा कुछ उगाता नही जहा पानी की कमी हो  ऐसी जगह पर ये खेती की जा सकती है. इसके लिए खाली सूर्य की किरानो की ज़रूरत होती है. जिनके पास ऐसी ज़मीन है वो दो-चार किसान साथ मिलके ऐसा प्रॉजेक्ट डाल सकते है. जिस तरह सहकारिता से दूध की डेरी, गन्ने का कारखाना चलता है वैसे ये भी चल सकता है. पाँच एकड़ ज़मीन पर 1 MW capacity का प्रॉजेक्ट खड़ा कर सकते है. उसमे बनानेवाली एनर्जी आप सरकार को या फिर private compani को बेच भी सकते हो. इस मे investment जरा ज़्यादा होती है, लेकिन long life होती है. सरकार आप को 30 % सबसिडी भी देती है और प्रॉजेक्ट डालने के लिए लोन भी. जिसका ब्याज दर बहोत कम होता है. इतनी सारी उपलब्धिया है फिर देर किस बात की. और polution विरहित एनर्जी बना कर आप एक तरह से देश सेवा भी कर रहे हो. इसलिए solar farming करना हमारे लिए ज़रूरी है.

     आज कल हमारे देश मे industrilization और civilization बहोत तेज़ी से बढ़ रहा है. जाहिर है electric energy की ज़रूरत भी तेज़ी से बढ़ रही है. हमारे पारंपरिक sources है, जैसे की कोयला, पानी ( hydro power plant), पवन उर्जा (wind power),biomass, gas, nuclear power plant ओर solar energy. हमारे देश की आज की उर्जनिर्मिति capacity है 344 GW. उसमे से 66% energy पारंपरिक energy sources से बनती है ओर 33% अपारंपरिक  energy sources से बनती है. हमारे सरकार ने यह target रखा है, की 2022 तक 100 GW power solar energy से बनएँगे ओर उसके लिए सरकार ने 100 अरब अमेरिकन डॉलर की investmet solar energy की निर्मिति के लिए किए है. ये आँकड़े बताते है की अगले पाँच साल मे solar energy निर्मिति क्षेत्र मे business के बहोत सारे अवसर पैदा होंगे. हमारे देश की भौगोलिक रचना ऐसी है की कई जगह पर सुर्य की किरने अच्छी आती है ओर वाहा solar energy ज़्यादा से ज़्यादा बनाई जा सकती है, इसलिए सरकार ने solar energy  प्रधान्य दिया है.
      
     हमारे सरकार का 100 GW टारगेट है. उसमे से 40 GW रूफ टॉप सोलर पॅनल इन्स्टलेशन से electric energy बनाने का प्रयत्न है.उसके लिए सरकार जनता को आवाहन कर रही है की अपने घर के छत पे solar pannel बिठा के उसे Grid को जोड़े ओर electric energy बनाए और उसे खुद ही use करे और उसके लिए सरकार हम को सब्सिडी देगी. मतलब प्रति unit हम जितनी  electric energy use करेंगे उसके पैसे सरकार हमे देगी. मतलब आम के आम और गुठलियो के दाम. इससे ज़्यादा से ज़्यादा जनता इसमे शामिल हो यही सरकार का इरादा है. क्योकि ये इक प्रदूषण मुक्त energy source है. घर, कॉलेज,हौसिंग सोसायटी,बॅंक,होटेल इन जगह ये  electric energy बनाई जा सकती है. इसमे investment ज़रा ज़्यादा होती है. लेकिन वो investment  lifetime होती है.
        
        कैसे शुरू करे SOLAR BUSINESS -
     
     इस business मे आप छोटी से छोटी शुरूवात कर के बड़े से बड़ा business बना सकते हो. ये business दो चीज़ो पे डिपेंड करता है. इक आर्थिक क्षमता और दूसरी तकनीकी जानकारी. इस मे आप solar product के agent से लेके distributer तक का सफ़र तय कर सकते है. agent बनाने के लिए महज आपको 10 या 12 हज़ार की investment होगि. किसी बड़े कंपनी के product आप कमिशन बेसिस पे बेच सकते है. दूसरा विकल्प ये है की यही कंपनिया franchise देती है. जिन मे से दो चार नाम मै यहा देता हू, जैसे Bharat solar energy, Relyon Solar,Inter solar,Su-kam Solar और भी बहोत सारी कंपनिया है जिसकी franchise आप ले सकते हो.  हर सिटी के टीयर के हिसाब से investment होती है. आप इन बड़ी कंपनियो के associate बन सकते है. जिसके लिए आपको 250 sq/fit का शॉप लगेगा आप dealership भी ले सकते हो, जिसमे अप को 50 हज़ार से 2 लाख तक investment लगेगी और आप की सेल्स और टेक्निकल टीम लगेगी और बाद मे distributer बन सकते हो.जिसके लिए आप को 5 लाख से 6 लाख investment लगेगा, office और strong टेक्निकल टीम और सेल्स टीम लगेगी जो ग्राहक को solar energy के फ़ायदे और importance समज़ा सके. टेक्निकल टीम का भी रोल महत्वपूर्ण है जो जितनी जगह available उसमे  सोलर पॅनल डिसाइन और इन्स्टॅलेशन कर सके. ये कंपनिया आप को टेक्निकल जानकारी के साथ प्रशिक्षण भी देती है. 
   
     SOLAR BUSINESS की उपल्बधी -
    
     Solar product बहोत टाइप के होते है जैसे पानी गरम करने का पूरा सिस्टिम,Solar light,Solar चूल्हा, Solar sreetlight, आप खुद भी कोई प्रॉडक्ट बना के बेच सकते हो जैसे solar mobile, laptop charger. solar light. आप भी  Solar Farming  कर  सकते हो. लेकिन इसमे investment बहोत ज़्यादा होती है. Solar product बेचने के बाद उसके servicing का अपना एक अलग business हो सकता है. Solar product को insurance होता है वो ग्राहको को दिला देना, सरकार जो सब्सिडी देती है वो दिला देना और बड़े प्लांट को बड़ी investment लगती है वो दिला देना ये भी एक नये प्रकार के business की उपल्बधी है. solar panel और inverter जो की बाहर देश से माँगते है उनका निर्माण भी यहा किया जा सकता है. इस मे 14/15 लाख की investment है लेकिन आगे ये बिज़नेस बढ़ने वाला है.
       कुल मिलाकर ये इक unique business है.
      
     उपर की जानकारी internet और magzine से collect की गई है. आप जब business स्टार्ट करे तब और जानकारी निकाले , ठीक से प्रॉजेक्ट बनाइए, business plan बनाइए, custemer strategy बनाइए हमारा उद्देश् सिर्फ़ सुजाव रखना है. 
  

Thursday, 11 October 2018

October 11, 2018

zero budget kheti business

हेलो फ्रेन्डस,

         हमारा देश खेती प्रधान देश है. ओर शायद यही हमारी सबसे बडी ताकत है. यही ताकत का सही इस्तेमाल करके हमारा देश ओर भी financial strong बन सकते है. लेकीन हालात बिलकुल उल्टे है, हम industrialization की तरफ बिना limit के भाग रहे है. ओर देश का किसान या तो आत्महत्या कर रहा है,या फिर उसी  industrialization को अपनी जमिन बेच रहा है. बाहरी देश कि कंपनिया यहा industrialization बढा के सारा पैसा अपने देश लेके जाती है.

        हमारे खेती प्रधान देश मे दाल  80 से 90 रूपये के भाव मिलती है. ओर हर साल लाखो टन दाल बाहरी देश से मंगाई  जाती है. आॅस्टोलिया, कॅनडा जैसे प्रगत देश ओर आफ्रीका के अप्रगत देश हमको दाल सप्लाय करते है. जैसे इन देशों कि दाल की खेती बनी ही है हमारे देश को दाल सप्लाय करने को. हमारे देश मे 60% जनता खेती करती है,फिर भी हमारी हालत इतनी गंभीर है. तो सोचिये कोई businessman इस खेती को business touch दे तो हमारे देश का कितना पैसा जो बाहर देश जाता है वो बच जायेगा.

         खेती मे ज्यादा पैसा रासायनिक खाद पे जाता है. जितना पैसा रासायनिक खाद पे जाता है उसके हिसाब से मुनाफा कम होता है. ओर खेती का budget बढ जाता है.ओर ज़मीन की उपजाऊ क्षमता भी कम होती है. किसी भी buisiness मे success पाने के लिए उसका budget perfect होना चाहिए.  इसलिए आज हम बात करेंगे ZERO BUDGET KHETI की. जिस मे आप सिर्फ इक गाय पालकर 30 एकड खेती कर सकते हो. जिसके founder है पद्मश्री  पुरस्कार सन्मानित श्री. सुभाष पालेकर सर.
zero budget kheti business
                                     
        पद्मश्री श्री. सुभाष पालेकरजी का जनम महाराष्ट्र के अमरावती जिले के बेलोरा गाव मे हुआ. वो कृषी विज्ञान से graduate है. पहले दस साल उन्होने भी रासायनिक खेती की. पहले अच्छी खेती हुई लेकीन बाद उसमे घाटा होने लगा. इसका solution निकालने के लिए वो बडे बडे agreecultural officers को मिले लेकीन उनको कोई समाधान मिला नही. फिर उन्होने ठान लिया की वो खुद ही इसका solution निकाल लेंगे ओर इस प्रकार ZERO BUDGET KHETI  का जनम हुआ.
         
        बिजामृत, जिवामृत, अच्छादन और वाफसा ये चार बहोत ही महत्वपूर्ण सुत्र है ZERO BUDGET KHETI के. अपने खेती के संसाधनों को उपयोग मे लाना ये इसका मुलमंत्र है 
        
        बिजामृत - फसल पडनेवाले किडों तथा रोगों को ये नियंत्रीत करता है. देसी गाय का गोबर,गोमूत्र ओर चूना से ये बनाया जाता है.
        
         जिवामृत - फसल की अच्छी पैदावार के लिए जिवामृत बहोत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. देसी गाय का गोबर,चूना ओर गुढ से जिवामृत बनाया जाता है.
        
         वाफसा- वाफसा माने भूमि में हर दो मिट्टी के कणों के बीच जो खाली जगह होती है, उन में पानी का अस्तित्व बिल्कुल नहीं होना चाहिए है, उन में हवा और वाष्प कणों का सम मात्रा में मिश्रण निर्माण होना चाहिए. वास्तव में भूमि में पानी नहीं, वाफसा चाहिए, याने हवा 50% और वाष्प 50% इन दोनों का समिश्रण चाहिए.आजकल पानी की कमी भी महसूस होती है. इस मे 90% पानी की बचत होती है.

         आच्छादन - हम जब दो बैलों से खींचने वाले हल से  जोताई करते हैं, तब भूमि पर मिट्टी का आच्छादन ही डालते हैं. जिस से भूमि की अंतर्गत नमी और उष्णता वातावरण में उड़कर नहीं जाती, बची रहती है.जब हम हमारी फ़सलों की कटाई के बाद दाने छोड़कर फ़सलों के जो अवशेष बचते हैं, वह अगर भूमि पर आच्छादन स्वरूप डालते हैं, तो अनंत कोटी जीवजंतु और केंचवे भूमि के अंदर बाहर लगातार चक्कर लगाकर चौबीस घंटे भूमि को बलवान,ओर समृद्ध बनाने का काम करते हैं और हमारी फ़सलों को बढ़ाते हैं. हम  मिश्रित फसलें लेते हैं, उन्हें भी सजीव आच्छादान कहते हैं.

          उन्होने palekarzerobudgetspiritualfarming  इस वेब साइटपर पूरी जानकारी दी है.बहोत सारी किताबे भी लिखी है.  spiritual याने आध्यात्म.आध्यात्म खेती जो की भगवान बनता है. जंगलों मे जो पेड़ पौधे होते है, उन्हे इंसान तो बनता नही तो कोंन  बनता है. बिना कुछ किए वो कितना फलते फुलते ये कैसे होता है. उन्हे भगवान बनता है. वो कहते है ना की, भगवान के मर्जी के बिना पेड़ का पत्ता भी नही हिलता ओर उनका ये विचार बहोत सही है.
       
          आज देश विदेश मे इस तंत्र से ये खेती की जा रही है. ये इक natural खेती है. इस से रासायनिक खेती से होनेवाले अनेक रोगों तथा बिमारीयों से भी बचा जा सकता है. Natural खेती से बनी चीज़ो के दाम भी अलग होते है, उन्हे स्पेशली खरीदनेवाले लोग भी होते है जो ज़्यादा भाव देके ये चीज़े खरीदते है.
       
        मैने पहले भी ayurvedik खेती business पे एक पोस्ट लिखा था, वो इस तंत्र से की जा सकती है ओर जिन किसान भाइयो तक ये तंत्र ये ज्ञान अब तक पहुँचा नही उन तक भी ये पहुँचे ओर वे भी इसका लाभ उठाए ओर देश को ओर आर्थिक शक्तिशाली बनाए यही मेरा एक सतविचार  है.
       धन्यवाद.
         

Sunday, 30 September 2018

September 30, 2018

Costumer Srategy For Buisiness


                                                     
Costumer Strategy For Buisiness

  फ्रेंड्स ,
          चलो हमने कोई buisiness idea चुन लिया, उसके लिए finance,location, भी चुन लिया, pruduct भी तय्यार हो गया. लेकिन custmer का क्या वो कहा से आएगा? मैने देखा है, कुछ लोगो को idea ओर location बहोत अच्छे होते है, पर buisiness नही चलता. क्यो की हम सोचते है वैसे होता नही, कभी कभी तो कस्ट्मर लाना पड़ता है. आज हम इस पोस्ट मे custmer strategy for buisiness के बारे मे बात करेंगे जो की मेरे कुछ अनुभव है, ओर मेरे कुछ दोस्तो की कहानिया भी है. ओर हा इक buisinessman की क्या ज़िम्मेदारिया है, समाज के हित के लिए ओर देश के हित के लिए उसे क्या करना चाहिए ये हम आगले पोस्ट मे बात  करेंगे .
        
           मेरे एक दोस्त ने एक छोटसा होटेल ओर आइस्क्रीम का दुकान चालू किया. सब तय्यरी कर ली,आच्छा सा furniture किया, होटल अच्छा डेकोरेट किया. बोर्ड भी लगा दिया  'X होटेल ओर आइस्क्रीम पार्लर'. उसका लोकेशन ऐसा था की पब्लिक बस स्टॅण्ड से  1.3 km का distance था ओर आगे 1.2 km पर इक बहोत बडी स्टील कंपनी थी.जीसके गेट के आगे भी एक पब्लिक बस स्टॅण्ड नया नया बना था.क्योकी कंपनी के वर्कर वहा खडे रहते थे बस के लिये. ओर बिच मे मेरे दोस्त का होटल. उसने दोनो स्टॅण्ड पे बोर्ड भी लगा दिये.गाव के स्टॅण्ड पे बोर्ड  दिया, " X होटल ओर आइस्क्रीम पार्लर" 1.3 km ओर कंपनी गेट के स्टॅण्ड पे बोर्ड  दिया," X होटल ओर आइस्क्रीम पार्लर" 1.2 km दुरी पर.लेकिन फिर भी कस्टमर नही आ रहे थे,होटल मे जो चीज़े बनती थी उसका टेस्ट भी अच्छा था.लेकिन फिर भी मेरे दोस्त का होटल चल नही रहा था.
           

            इक दिन मै अपने बाईक से वहा से गुजर रहा था उसने मुझे देखा ओर मुझे बुला दिया. फिर चाय वाय हो गई ओर हम इधर उधर गप्पे मारने लगे.बातो बातो मे उसने मुझे सब हालात बता दिये.मैने कहा यार दोनो मे से किसी एक स्टॅण्ड पर तुम अपना होटल क्यो नही डाले. तो वह बोला ये जगह उसकी खुद कि है ओर रोडटच भी है, इसलिये इधर डाला.मैने ऐसे हि उसे पुछा ये जो distance लिखा है,गाव के स्टॅण्ड से 1.3 km ओर कंपनी के गेट स्टॅण्ड से 1.2 km ये सही है क्या? वह बोला रोड सर्वे के हिसाब से सही है.मै उसे ऐसे ही बोला की यार ये तेरी दुरी देखकर शायद कस्टमर आते नही होंगे ओर मै वहा से  निकल गया.

            कुछ दिन बाद मै फिर वहा से गुजर रहा था तो मैने देखा मेरे दोस्त के होटल मे बहोत भिड है,ओर उसके होटल के सामने जो पेड था वहा भी बहोत सारे लोग खडे है.मै अंदर गया .मैने मेरे दोस्त से पूछा यार क्या फाॅरमूला आजमाया की तेरा होटल चलने लगा वह बोला कुछ नही यार दोनो बस स्टॅण्ड पर जो बोर्ड लगाये थे उस दुरी 0.5 km लिख दी.मतलब " X होटेल ओर आइस्क्रिम पार्लर" 0.5 km.पर है.
            इस से इक बात समज आती है की कस्टमर कोई भी चिज नजदिक चाहीए 1.2 km उसे दुर लगती है, पर 0.5 km  उसे  ज्यादा दूर नही लगता.वो सोचता चलो आधा किलोमिटर ही है, बाते करते जायेंगे ओर चाय नाष्टा भी हो जायेगा.ओर उसी होटल के सामने अभी ओर इक नया पब्लिक बस का स्टॅण्ड तैयार हो गया उस होटल के सामने जो पेड था वही.कस्टमर के मानसिकता को मेरे दोस्त ने बराबर पहचान लिया था.    
           छोटा होटल हो या कोई  corporate buisiness ये छोटी छोटी बाते बहोत मायने रखती है,कोई भी buisiness की growth करने मे.
      
               हम कोई buisiness करे, या कोई भी काम करे उसे अलग तरीके से करना चाहीए.आप देखिये जितने भी महान व्यक्ती है उन्होंने कोई भी काम अलग तरीके से किया है.
     
            मै यहा आपको अमेरिका के high jumper RICHARD DOUGLAS FOSBURY के बारे मे बताना चाहूंगा.उन्होंने 1968 के आॅलम्पिक मे गोल्ड मेडल जिता था.इस मे खास बात ये थी उन्होंने पहली बार high jump पिठ के बल मारने का प्रयोग किया था.तब तक सब लोग साधारण high jump मारते थे.ओर आज सभी high jumper उनका ही अनुकरण करते है.कहने का मतलब यही है की कोई भी काम अलग तरीके से अलग सोच से करना चाहिए.तब ही वो काम ओर वो व्यक्ति महान बनाते है.
         धन्यवाद.

Thursday, 27 September 2018

September 27, 2018

COMPANY REGISTRATION INFORMATION FOR BUISINESS STARTUP

             
               हाय फ्रेंड्स कोई बिजनेस या कंपनी शुरू करने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन करना बहोत ज़रूरी होता है.जिस मे कुछ खास चीज़ो का ध्यान रखना पडता है.जैसे सरकार  को टॅक्स देना पड़ता है. अगर प्रॉपरायटर बिज़्नेस मे कुछ घाटा हो जाए तो वो रिकवर करने के लिए अपनी खुद की प्रॉपर्टी भी यूज़् करनी पडती है.प्रायवेट लिमिटेड कंपनी मे ये रिस्क कम होती है. कुछ कंपनी मे बहोत सारे रेकॉर्ड रखने पड़ते है, जैसे आप कोई फुड प्रॉडक्ट बना रहे हो तो उसके लिए आप को FSSAI का सर्टिफिकेट लेना पड़ता है,कोई प्लास्टिक प्रॉडक्ट है तो उसके लिए कुछ अलग सा डॉक्युमेंटेशन होते है. BRC/IOP ओडिट होते है. और सबसे महत्वपूर्ण बात कमणी की ग्रोथ जिस मे आपके कस्ट्रमर प्रॉडक्ट पब्लिसिटी ओर बहोत सारी बाते जो हम पहले भी डिस्कस कर चुके है.
         
                               
compani registration information for buisiness

           COMPANY REGISTRATION FORMATE

  •  SOLE PROPRITERSHIP - सोल प्रॉप्ररिटेर यानी की आप खुद उसके मलिक यानी की दूसरा कोई नही. ये कोई खास रेजिस्ट्रेशन नही होता. आप जिस एरिया मे रहते हो चाहे हो नगरपरिषद हो ग्राम पंचायत वाहा से आपको एक सर्टिफिकेट लेना पड़ता है या फिर GST रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है  ओर हर साल टॅक्स भरना पड़ता है बस. ये बिजनेस स्टार्ट करने मे आसान होते है. ग्रोसरी शोप से लेके  सलूण तक सारे बिजनेस इसमे आते है इसका फ़ायदा यह है की जो भी डिसिशन लेना है आप को ही लेना हैलेकिन नुकसान ये है की जो भी फ़ायदा नुकसान होगा वो आप का होगा. इस मे कोई इन्वेस्टर नही मिलताजो भी फाइनान्स लगाना है वो आप को ही मॅनेजकरना है

       

  •  GENERAL PARTNERSHIP-एक से ज़्यादा जिस बिजनेस मे पार्ट्नर हो उसे जनरल पार्ट्नरशिप कहते है इस मे ज़्यादा से ज़्यादा 20 पार्ट्नर होते है. इस पार्ट्नरशिप को रिजिस्टर करना पड़ता है उसे PARTNERSHIP DID कहते है. उस मे पार्ट्नर की इनवेस्टमेंट ओर प्रॉफिट की हिस्सेदारी तथा काम के बारे मे पूरी जानकारी लिखित रूप मे होती है. इस मे सबसे ज़्यादा नुकसान वाली यही बात होती है की आगर नुकसान हो जाये तो हो भी सब मे उसी हिसाब मे आ जाता है.

         

  •   LIMITED LIABILITY PARTNERSHIP -लिमिटेड लाइयबिलिटी जनरल पार्ट्नरशिप जैसी ही होती है. इस मे ज़्यादा से ज़्यादा 50 ओर कम से कम 2 पार्ट्नर होते है.जनरल पार्ट्नरशिप मे कुछ प्राब्लम हो जाए तो सब पार्ट्नर कंट्रिब्यूट करते है लेकिन इसमे वो लिमिट जरा कम है. इस डॉक्युमेंट्स कम होते है. इस मे कॅपिटल कम लगता है. शेर होल्डर  के प्रॉफिट पे टॅक्स नही लगता. ये अभी नया फॉर्मॅट है. कंपनी का नाम अप्रूव्ड होने के बाद उसे Ministry of Corporate Affair मे फाइल करना पड़ता है. पार्ट्नर अफिडेविट ओर डिक्लरेशन ,मेमोरॅंडम ऑफ असोसियेशन,सबस्क्राइबर शीट ओर रिजिस्टर्ड ऑफीस अड्रेस ये सब डॉक्युमेंट्स लगते है. 
         

  •  PRIVATE LIMITED- प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा ये है की इसमे आप इन्वेस्टर ले सकते हो. इसमे आप की लाइयबिलिटी लिमिटेड होती है. जितना आप का शेअर है उतना ही आप फ़ायदे ओर नुकसान के ज़िमेदार है.इस मे ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनवेस्ट करते है. इसका एक फ़ायदा है की अगर डाइरेक्टर बाहर भी जाएगा तो भी कंपनी चालू रहती है. इस मे डॉक्युमेंट्स बहोत ज़्यादा होते है. हर तरह की लीगल बातो का द्‍यान रखान पड़ता है.बहोत सारे ऑडिट होते है. इस मे टॅक्स ज़रा ज़्यादा होता है. आपके डीवीदेंट प्रॉफिट पे भी आप को टॅक्स देना पड़ता है. एक आदमी भी लिमिटेड कंपनी शुरू कर सकता है. मिनिमम कॅपिटल इनवेस्टमेंट करना पड़ता है,उसका मिनिमम लिमिट 1 लाख है. बॅंक लोन ओर फंड जमा करने के लिए ये बेस्ट तरीका है.
  •  ONE PERSON COMPANY( OPC)- SOLE PROPRITER फॉर्मॅट का ये ADVANCE रूप है. इस मे सिर्फ़ एक ओर एक ही आदमी होता है ओर सारे शेर्स एक ही आदमी नाम होते है.COMPANY ACT के अनुसार 2013 मे फॉर्मॅट लागू दिया . ईश मे ज़्यादा से ज़्यादा 15 डाइरेक्टर रख सकते है.PAID UP CAPITAL की CAPACITY 50 LAKH ओर TURN OVER 2 CR.है ये लिमिटेशन CROSS होने के बाद ओर दो साल पूरे होने पर इसको प्राइवेट या पब्लिक कंपनी मे CONVERT होना ही पड़ता है. ये इक प्राइवेट कंपनी है ओर इसको अपने नाम के आगे ( OPC ) लिखना पड़ता है. इक इंडियन सिटिज़न जो की इंडिया का रेसिडेंट हो ये कंपनी बना सकता है. नॉमिनी के लिए भी यही कंडीशन है. नॉमिनी माइनर ना हो.

            अगर आप कोई पार्ट्नरशिप करना चाहते हो तो हमेशा अछा पार्ट्नर चुने जिसे कोई बुरी आदत ना हो ओर जो लालची ना हो. उसकी सामाजिक प्रतिमा अच्छी हो.
             उपर दिए हुए सारे काम आप कोई अच्छे CA या CS से करवाए ताकि कोई कमी ना रह जाए ओर बाद मे कोई प्राब्लम ना खड़ी हो.